अंटार्क,टिका में मिला चार लाख साल पुराना उल्‍का,पिंड, धरती को महा,संकट से दिलाएगा मुक्ति

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बर्फ की मोटी चादर से ढंके अंटार्कटिका में वैज्ञानिकों को चार लाख 30 हजार साल पुराना उल्‍कापिंड म‍िला है। वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है क‍ि इस उल्‍कापिंड की मदद से ऐस्‍टरॉइड के धरती से टकराने के खतरे को समझा जा सकेगा।ब्रिटेन के केंट स्थित अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के एक दल को अंटार्कटिका की बर्फ की चादर के नीचे 4 लाख 30 हजार साल पुराने उल्‍कापिंड के टुकड़े मिले हैं।

इस खोज से वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्‍हें उम्‍मीद है कि इस प्राचीन उल्‍कापिंड की मदद से इस बात का आकलन किया जा सकेगा कि मध्‍यम आकार के ऐस्‍टरॉइड से धरती को किस तरह का खतरा हो सकता है।शोधकर्ताओं के दल ने कहा कि उल्‍कापिंड की मदद से ऐस्‍टरॉइड के टकराने पर होने व‍िनाशकारी परिणामों का भी आकलन किया जा सकेगा। वैज्ञानिकों को यह उल्‍कापिंड के टुकड़े पूर्वी अंटार्कटिका के वालनुम्‍फजेलेट चोटी पर मिले हैं। इस खोज से संकेत मिलता है कि कथित रूप से निचली कक्षा में चक्‍कर लगाने वाला उल्‍कापिंड धरती पर बहुत तेजी से गिरा था। उन्‍होंने बताया कि यह उल्‍कापिंड कम से कम 100 मीटर का रहा होगा।

यूनिवर्सिटी ऑफ केंट के वैज्ञानिक डॉक्‍टर मैटथिआस वॉन ने कहा कि इस उल्‍कापिंड का प्रभाव करीब 2000 किमी या लगभग एक उपमहाद्वीप तक रहा होगा। साइंस अडवांस जर्नल में प्रकाशित जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि इस तरह की घटनाओं के साक्ष्‍य जुटाना बेहद अहम है क्‍योंकि इसके जरिए उल्‍कापिंडों के पृथ्‍वी के टकराने के इतिहास और खतरनाक ऐस्‍टरॉइड के खतरनाक प्रभावों को समझा जा सकेगा।

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