बा’बरी मस्ज़ि’द को ढहा’ने वाले युवक की हुई दिमा’ग़ में की’ड़े पड़ने से मौ’त ?

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बा’बरी मस्जि’द गिराए जाने के केस में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. लालकृ’ष्ण आड’वाणी, मुर#ली मनो’हर जोशी और उमा भा#रती समेत सभी 32 आरोपियोंं को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा है कि पीछे से भीड़ आई, जिसने ढांचे को गिरा दिया. घटना पूर्व नियोजित नहीं थी. जो कुछ हुआ, अचानक हुआ था.

इस मौके पर हम आपको ऐसे दो कार’सेवकों की कहानी बताते हैं, जिन्होंने बढ़-चढ़कर मस्जि’द ढहाने में हिस्सा लिया था, लेकिन बाद में मुस्लि’म धर्म अपना लिया. दोनों ने ‘पाप धोने’ की बात कहकर 100 मस्जि’दों का नवीनीकरण करने का फैसला किया.

बल#बीर पानीपत में रहते थे. शिवसे’ना के नेता हुआ करते थे. आरए’सएस की विचारधारा से प्रेरित थे. शुरुआत में पानीपत की ‘शाखा’ में नियमित रूप जाते रहते थे. राम मं’दिर आंदो’लन के लिए पूरे जोश से अयो’ध्या गए थे. उनके साथ योगेंद्र पाल भी थे. बाद में उन्होंने पूरी घटना के बारे में बताया था. उनका कहना था कि हम दोनों ने बाब’री आंदो’लन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था. बलबीर ने दावा किया था कि

1 दिसंबर को अयो’ध्या पहुंचने वाले कुछ पहले कारसे’वकों में से हम भी थे. 6 दिसं’बर को बीच वाले गुंबद पर चढ़ने वाला सबसे पहला व्यक्ति मैं ही था.

6 दिसंबर, 1992 की घटना को याद करते हुए बलबी’र ने आगे बताया, ‘हमें डर था कि हमें रोकने के लिए सेना का प्रयोग किया जाएगा, लेकिन जमीन पर कोई प्रभावी सुरक्षा नहीं थी. इसी बात ने हमें प्रेरित किया. हम मानसिक रूप से तैयार थे कि आज इसे (बाब’री मस्ज़ि’द को) ध्वस्त कर देंगे.’

बल’बीर ने बताया था कि सोनीपत और पानीपत के कई अन्य कारसे’वकों के साथ उन्होंने भी गुंब’द को ध्वस्त करने के लिए कुदाल और गैती का इस्तेमाल किया था. काम समाप्त होने के बाद जब वे हरिया’णा के अपने गृह-नगर पानीपत पहुंचे, तो वहां एक ‘वीर’ की तरह सम्मान दिया गया. उन्होंने बताया कि जब मैं घर पहुंचा

तो परिवार की प्रतिक्रिया मेरे लिए चौंकाने वाली थी. मेरा परिवार धर्मनिर’पेक्ष है. उसने मेरी निंदा की. मैंने अपनी भावनाओं के चलते कारसे’वा में भाग लिया था, लेकिन बाद में मुझे अहसास हुआ कि यह गलत था. बल’वीर ने कहा,

मुझे यह मालूम था कि मैंने कानून हाथ में लिया था. भारत के संविधान का उल्लंघन किया था. अपराध बोध में मैंने जल्द ही इस्ला’म को गले लगा लिया.

बाद में बल#बीर ने अपना नाम मुहम्म’द आमि#र रख लिया. उनके सहयो’गी योगें’द्र का नाम मुहम्’मद उम’र हो गया. बल’बीर ने देश-भर में मस्ज़ि’दें बनाने और उनकी सुरक्षा का काम शुरू किया. एक बार बातचीत में उन्होंने कहा था,

“मैंने और योगेन्द्र दोनों ने अयो’ध्या में श्री राम मं#दिर का निर्माण करने की प्रतिज्ञा की थी, लेकिन अब 100 म’स्जिदों का नवीनीकरण करके हमने अपने पाप धोने का वचन लिया है.”

बल’बीर से आ’मिर बनने के बाद उन्होंने एक मुसल’मान महिला से शादी कर ली. इस्ला’म की शिक्षाओं को फैलाने के लिए एक स्कूल चलाने लगे. अपने सहयोगी योगेन्द्र पाल के साथ अब तक 90 से ज्यादा मस्जि’दें बना चुके हैं.

बल’बीर ने ये भी कहा था कि वह इस मामले में कहीं भी बयान दे सकते हैं. यहां तक ​​कि सीबी’आई या संबधित प्राधि’करण की सजा का सामना करने के लिए भी तैयार है.

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