मुस्लिम महिला ने चीन के डिटेशन कैंप की सुनाई खौ’फनाक आपबीती, ‘होता है हर रात सा मूहिक –

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चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मु स्लिम समुदाय के मानवाधिकार के घोर उल्लंघन के बारे में समय-समय पर रिपोर्टें आती रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत के यातना शिविरों (जिन्हें वह री-एजुकेशन कैंप कहता है) में लाखों उइगर मु’स्लिमों को कैद कर रखा है और उन्हें यातनाएं देता है। ये बातें कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में सामने आ चुकी हैं।

हालांकि, चीन इन रिपोर्टों को खारिज करता आया है। चीन के री-एजुकेशन कैंप की एक और खौफनाक यातनापूर्ण कहानी सामने आई है। बीबीसी की एक रिपोर्ट में एक उइगर महिला ने आपबीती सुनाई है। इस मु स्लिम महिला का दावा है कि चीन के ‘री-एजुकेशन’ कैंपों में आज भी पूरी योजना के साथ रेप और यौन उत्पीड़न होता है और उन्हें  खौफनाक यातनाएं दी जाती हैं।

यातना शिविरों में रखे गए 10 लाख से ज्याद उइगर चीन के इन यातना शिविरों में के बारे में रिपोर्टों में कहा गया है कि शिनजियांग प्रांत के इन कैंपों में 10 लाख से ज्यादा महिला एवं पुरुषों को रखा गया है। चीन का कहना है कि मुस्ल एवं अन्य समुदाय के लोगों को ‘दोबारा शिक्षित’ करने के लिए इन शिविरों को बनाया गया है। मानवाधिकार संगठन चीन के इन शिविरों पर सवाल खड़े गए हैं।

संगठनों का कहना है कि इन कैपों में उइगर समुदाय के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ है। चीन सरकार पर उइगर समुदाय की आजादी छीनने के आरोप लगे हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि शिविरों में लोगों को निगरानी में रखा जाता है। फिर उन्हें हिरासत में लिया जाता है और उनकी जबरदस्ती नसबंदी कर दी जाती है।

‘महिलाओं के साथ योजना बना कर होता है रे प’ शिनजियांग प्रांत के एक ऐसे ही कैंप से रिहा होने के बाद फरार होकर अमेरिका पहुंचीं तुरुसुने जियावुदुन के हवाले से बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के मुताबिक जियावुदुन का कहना है कि ‘प्रत्येक रात सेल से महिलाओं को उठाकर ले जाया जाता है।

मास्क पहने चीनी नागरिक बारी-बारी से उनका रे प करते हैं।’ जियावुदुन के अनुसार कैंप में वह खुद इस तरह की यातना से गुजर चुकी हैं। उनका कहना है कि कैंप में उनके साथ तीन बार हुआ और हर बार उनके साथ भी दो से तीन लोगों ने किया।

शिविरों में यातना की रिपोर्टों को खारिज करता आया है चीन रिपोर्ट में कहा गया है कि जियावुदुन के दावों और बातों की पुष्टि करना मुश्किल है क्योंकि चीन में रिपोर्टिंग पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं लेकिन जियावुदुन ने बीबीसी को अपनी यात्रा एवं प्रवासन से जुड़े जो दस्तावेज सौंपे हैं उससे उनकी बातें सहीं मालूम पड़ती हैं। पिछले महीने अमेरिका ने शनिजियांग प्रांत में चीन की कार्रवाइयों को ‘नरसंहार’ करार दिया।

चीन अपने कैंपों में ‘लोगों को जबरन कैद रखने, उनका नसबंदी करने’ की रिपोर्टों को ‘झूठा’ बताकर खारिज करता आया है। हालांकि, इन कैंपों में हिरासत में रखे गए कई लोगों ने इन शिविरों की असलियत उजागर की है। इन लोगों ने भी माना है कि इन शिविरों में महिलाओं के साथ सामूहिक होता है और उन्हें यातानाएं दी जाती हैं।

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