किसान आंदोलन को लेकर शिवेसना का मोदी सरकार पर हम,ला,न्यायालय के कंधे पर रख कर बन्दू,क

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केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसान आंदोलन का आज 50वां दिन है इस बीच शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है. शिवसेना ने कहा है कि सरकार ने न्यायालय के कंधे पर बंदू,क रखकर किसानों पर चलाई है, लेकिन किसान संगठन ‘करो या म,रो’ के मूड में हैं।शिवसेना ने कहा,सुप्रीम कोर्ट ने तीन कृषि कानूनों को स्थगनादेश दे दिया है. फिर भी किसान आंदोलन पर अड़े हुए हैं.

अब सरकार की ओर से कहा जाएगा, ‘देखो, किसानों की अकड़, सुप्रीम कोर्ट की बात भी नहीं मानते.’ सवाल सुप्रीम कोर्ट के मान-सम्मान का नहीं है बल्कि देश के कृषि संबंधी नीति का है.किसानों की मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द करो. निर्णय सरकार को लेना है. सरकार ने न्यायालय के कंधे पर बंदूक रखकर किसानों पर चलाई है लेकिन किसान हटने को तैयार नहीं हैं।

किसान संगठन ‘करो या म,रो’ के मूड में हैं- शिवसेना।सामना में आगे लिखा, ”किसान संगठनों और सरकार के बीच जारी चर्चा रोज असफल साबित हो रही है. किसानों को कृषि कानून चाहिए ही नहीं और सरकार की ओर से चर्चा के लिए आनेवाले प्रतिनिधियों को कानून रद्द करने का अधिकार ही नहीं है. किसानों के इस डर को समझ लेना आवश्यक है.

सरकार सुप्रीम कोर्ट को आगे करके किसानों का आंदोलन समाप्त कर रही है. एक बार सिंघू बॉर्डर से किसान अगर अपने घर लौट गया तो सरकार कृषि कानून के स्थगन को हटाकर किसानों की नाकाबंदी कर डालेगी इसलिए जो कुछ होगा, वह अभी हो जाए. किसान संगठन ‘करो या म,रो’ के मूड में हैं।आंदोलन में खालिस्तान समर्थक घुस गए, यह बयान धक्कादायक- शिवसेना।शिवसेना ने कहा, ”सरकार आंदोलनकारी किसानों को चर्चा में उलझाए रखना चाहती थी.


किसानों ने उसे नाकाम कर दिया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानून पर स्थगनादेश के बावजूद यह ‘पेंच’ नहीं छुटा. सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से चर्चा करने के लिए चार सदस्यों की नियुक्ति की है. ये चार सदस्य कल तक कृषि कानूनों की वकालत कर रहे थे इसलिए किसान संगठनों ने चारों सदस्यों को झिड़क दिया है. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि आंदोलन में खालिस्तान समर्थक घुस गए हैं! सरकार का यह बयान धक्कादायक है. आंदोलनकारी सरकार की बात नहीं सुन रहे इसलिए उन्हें देशद्रोही, खालिस्तानवादी साबित करके क्या हासिल करनेवाले हो? चीनी सैनिक हिंदुस्थान की सीमा में घुस आए हैं. उनके पीछे हटने की चर्चा शुरू है लेकिन किसान आंदोलनकारियों को खालिस्तान समर्थक बताकर उन्हें बदनाम किया जा रहा है।

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