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रवीश कुमार ने अमित शाह को लेकर दिया बड़ा बयान ‘अमित शाह अब एक अलग देश बन गए हैं’

भारत में कोरोना वायरस एक बार फिर से तेजी से पैर पसार रहा है। प्रतिदिन करीब लाख नए केस सामने आ रहे हैं। ऐसे में ये चर्चा आम हो गई है कि क्या फिर से देशव्यापी लॉकडाउन लग सकता है। इसी मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह औऱ चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।रवीश कुमार ने लिखा – चुनाव आयोग ने ही नियम बनाया है कि कोरोना के काल में रोड शो किस तरह होगा। उन नियमों का गृहमंत्री अमित के रोड शो में पालन नहीं होता है।

रोड शो में अमित शाह मास्क नहीं लगाते हैं। जब आयोग गृह मंत्री पर ही एक्शन नहीं ले सकता तो वह विपक्षी नेताओं के रोड शो पर कैसे एक्शन लेगा ? लेकिन अमित शाह आयोग के नियमों का पालन करते तो आयोग विपक्षी दलों की रैलियों में ज़रूर एक्शन लेता कि कोविड के नियमों का पालन नहीं हो रहा है।रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट मे लिखा कि, ‘चुनाव आयोग हर दिन अपनी विश्वसनीयता को गंवा रहा है। क्या चुनाव आयोग अमित शाह पर कार्रवाई कर सकता है? इस सवाल को पूछ कर देखिए।

आपको महसूस होगा कि आप खुद से कितना संघर्ष कर रहे हैं। ख़ुद को दांव पर लगा रहा है। अमित शाह पर कार्रवाई की बात आप कल्पना में भी नहीं सोच सकते और यह तो बिल्कुल नहीं कि चुनाव आयोग कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा। क्योंकि अब आप यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव आयोग की वैसी हैसियत नहीं रही। आप जानते हैं कि कोई हिम्मत नहीं कर पाएगा।’दोबारा से लॉकडाउन की संभावनाओं पर रवीश कुमार ने लिखा– ‘तालाबंदी और कर्फ्यू की विश्वसनीयता ख़त्म हो चुकी है। पहली बार जनता को लगा था कि अगर बचने के लिए यही कड़ा फ़ैसला है तो सहयोग करते हैं।

इस मामले में जनता के सहयोग करने का प्रदर्शन शानदार रहा। हालांकि उसे पता नहीं था कि तालाबंदी का ही फ़ैसला क्यों किया गया? क्या यही एकमात्र विकल्प था? हम आज तक नहीं जानते कि वो कौन सी प्रक्रियाएं थीं ? अधिकारियों और विशेषज्ञों ने क्या कहा था? कितने लोग पक्ष में थे? कड़े निर्णय लेने की एक सनक होती है। इससे छवि तो बन जाती है लेकिन लोगों का जीवन तबाह हो जाता है। वही हुआ। लोग सड़क पर आ गए। व्यापार चौपट हो गया।

फिर जनता ने देखा कि नेता किस तरह लापरवाह हैं। चुनावों में मौज ले रहे हैं। बेशुमार पैसे खर्च हो रहे हैं। लगता ही नहीं कि इस देश की अर्थव्यवस्था टूट गई है। रैलियों में लाखों लोग आ रहे हैं। रोड शो हो रहा है। यहाँ कोरोना की बंदिश नहीं है। लेकिन स्कूल नहीं खुलेगा। कॉलेज नहीं खुलेगा। दुकानों बंद रहेंगी। लोगों का जीवन बर्बाद होने लगा और नेता भीड़ का प्रदर्शन करने लगे। यही कारण है कि जनता अब और कालाबाजारी झेलने के लिए तैयार नहीं है।

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