कांग्रेस के घर मे घुसकर ओवैसी ने मचाया घमासान, बाकी दलों ने अपनाया उनका ये तरीका

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पश्चिम बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी के निशाने पर इस बार किसी सियासी दल से ज्यादा कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का गढ़ है। ओवैसी का पुरजोर विरोध करने वाले अधीर को उनके ही घर मे चुनौती देने के लिए ओवैसी केवल मुर्शिदाबाद में चुनाव लड़ रहे हैं। एआईएमआईएम तेरह सीट पर चुनाव लड़ने जा रही है। माना जा रहा है कि ओवैसी ने सोच समझकर ममता को सीधी चुनौती देने से परहेज किया है।

मुस्लिम मतों को बांटने का आरोप ओवैसी पर न लगे इसलिए उन्होंने बहुत सोचसमझकर सीमित इलाके में ही उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। एआईएमआईएम को लगता है कि मुर्शिदाबाद में फोकस करने पर पार्टी यहां भी अपना खाता खोल सकती है। पहले उनकी रणनीति गठबंधन के जरिये पूरे बंगाल में चुनाव लड़ने की थी। फिलहाल ओवैसी बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं में सेंधमारी न कर पाए इसके लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस भी अपनी अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल एआईएमआईएम के राज्य प्रभारी जमीरुल हसन ने भी पार्टी को अलविदा कहा तो इससे भी दूसरे खेमे उत्साहित हुए। उधर, भाजपा का मानना है कि ओवैसी के चुनाव मैदान में आने से लड़ाई दिलचस्प होगी। उनके भाषणों के आधार पर भाजपा अपने ध्रुवीकरण के एजेंडे को धार दे सकती है।

गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद में विधानसभा की कुल 22 सीट है, जिसमें से कांग्रेस पिछले चुनाव में 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी। मुर्शिदाबाद अधीर रंजन चौधरी का गढ़ माना जाता है। बंगाल में 2011 का चुनाव हो या 2016 का अधीर रंजन अकेले दम पर कांग्रेस को इन इलाकों में जीत दिलाई है।

बताया जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी के यहां लड़ने से सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को ही होगा। दरअसल ओवैसी की अधीर से नाराजगी अनायास नही है। बंगाल में संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश के दौरान फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने ओवैसी की पार्टी को संयुक्त मोर्चा में शामिल करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अधीर रंजन चौधरी ने पीरजादा की इस मांग को ठुकरा दिया था। कांग्रेस के साथ सीपीएम और आईएसएफ का गठबंधन है। इसके पहले आईएसएफ और ओवैसी के बीच भी गठजोड़ की चर्चा थी। फिलहाल राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए इस समुदाय का रुझान पढ़ने की कोशिश विभिन्न दल कर रहे हैं।

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