जब एक हब्शी ने हुज़ूर (स.अ.व.) से पूछा “हम खाना खाते हैं लेकिन पेट नही भरता’ तो आपने जवाब दिया

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उमर बिन अबू सलमा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की मैं एक बार रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम की खिदमत में हाज़िर हुआ तो आपके सामने खाना रखा हुआ था आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया बेटा क़रीब हो जाओ और बिस्मिल्लाह कह कर अपने दाहिने हाथ से और अपने सामने से खाओ| जामिया तिरमिज़ी , जिल्द 1, 1915-सही।आईशा रदी अल्लाहू अन्हा से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया अगर तुम में से कोई खाना खाने लगे तो बिस्मिल्लाह कहे ओर अगर शुरू में कहना भूल जाए तो ये कहे बिस्मिल्लाह फ़ि अव्वलीही वा आख़िरीहि अल्लाह के नाम के साथ इस के शुरू में और आखिर में| जामिया तिरिमिज़ी , जिल्द 1, 1917-सही

वहशी इब्न हर्ब रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम से सहाबा रदी अल्लाहू अन्हु ने पूछा की या रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम हम खाना खाते हैं लेकिन पेट नही भरता|तो आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया शायद तुम अलग अलग खाते हो उन्होने कहा की जी हाँ, तो आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया तुम लोग अपने खाने को साथ मिलकर और अल्लाह का नाम लेकर खाया करो, तुम्हारे खाने में बरकत होगी|

जैसे कि आप सभी जानते है कि खाना हमेसा अपने परिवार के साथ खाना चाहिए,इससे बरकत भी होती है ।

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