इरफ़ान पठान ने कंगना, सचिन तेंदुलकर, अजय देवगन, और अक्षय जैसे लोगों को मुँह तोड़ जवाब दिया है ?

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29 जनवरी 2006. कराची. इंडिया वर्सेज़ पा किस्तान. टेस्ट मैच. इतिहास में खेला गया एक हज़ार सात सौ तिरासिवां टेस्ट मैच. धुंध से घिरी सुबह जब टॉस हुआ तो राहुल द्रविड़ ने पहले बैटिंग करने की सोची. पाकि स्तान अभी ठीक से जाग भी नहीं पाया था. ख़बर आई कि पहले ही ओवर में तीन विकेट गिर गए. पाकि स्तान ने अपना खाता भी नहीं खोला था. पहली तीन गेंदों में एक भी रन नहीं. चौथी, पांचवीं और छठी गेंद पर एक-एक कर तीन बैट्समैन आउट हुए. हैट्रिक. इंडिया का पहला फ़ास्ट बॉलर, जिसने हैट्रिक ली हो.

इयान चैपल ने अरसे पहले एक बात कही थी, “अगर एक टीम टॉस जीतकर पहले बॉलिंग करे और पहले ही दिन पहले सेशन में तीन विकेट निकाल ले, तो वो टीम उस मैच को हार नहीं सकती थी.” यहां पहले ही ओवर में तीन विकेट टंगे हुए थे. टीम इंडिया चहक रही थी. इरफ़ान पठान! हैट्रिक लेने वाला बॉलर. वही पठान जिसके बारे में मैच से कुछ ही रोज़ पहले अफ़रीदी ने कहा था कि इरफ़ान चुक चुका है. सीरीज़ की पहली दो इनिंग्स में पठान ने 219 रन देकर मात्र 1 विकेट लिया था. यहां 32 गेंदों बाद अफ़रीदी की बैटिंग आ रही थी. 19 साल का वो लड़का जो खुद 6 नंबर पर बैटिंग करने आता था.

इरफ़ान पठान. बड़ौदा में पैदा हुआ पठान. तारीख 27 अक्टूबर 1984. सबसे पहली दोस्ती हुई गरीबी से. मस्जिद में रहने वाले पठान परिवार का मुखिया मुएज़्ज़िन था. अपने बड़े बेटे यूसुफ़ और छोटे बेटे इरफ़ान को वो इस्लामिक स्कॉलर बनाना चाहता था. मगर इन दोनों को मोहब्बत हुई क्रिकेट से. मस्जिद में आने वाले नमाज़ी अक्सर इन दोनों बेटों की शिकायत करते मिलते. बड़े पठान साहब उनसे माफ़ी मांगते न थकते. शुरुआत में इरफ़ान की गेंदें एक फुल लेंथ पिच के दूसरे छोर तक नहीं पहुंच पाती थीं. मगर साथ दिया परिवार में चल रहे अनुशासन ने. और खुद के तप ने. चिलचिलाती गरमी में गेंद फेंकता इरफ़ान पठान एक आम बात थी.

गरीबी का आलम ये था कि सालों तक इरफ़ान ने सेकंड हैंड क्रिकेट उपकरणों का सहारा लिया. ग्लव्स, पैड्स बल्ला सब कुछ. मगर इरफ़ान के हाथ में नयी गेंद बेहद जंचती थी. वही नयी गेंद जिससे वो सालों बाद पाकिस्तान की ज़मीन पे उन्हीं के खिलाफ़ हैट्रिक लेंगे. उन दिनों पठान को इस बात का शायद इल्म भी नहीं होगा कि उनके हाथ से छूटी गेंदें स्विंग होकर इतिहास में दर्ज हो जायेंगीं. पठान को पहली बार नए क्रिकेट इक्विपमेंट मिले जब उसका सेलेक्शन बड़ौदा अंडर-15 टीम में हुआ.

दिसंबर 1997 में अंडर 16 में 1 विकेट और 1 और 11 रन बनाने के बाद उसे टीम से ड्रॉप कर दिया गया. पठान की उम्र थी मात्र 13 साल. दो साल तक कोई मैच नहीं. नवंबर 1999 में अंडर 19 टीम में महाराष्ट्र के खिलाफ़ 61 और 9 रन बनाये और 41 रन देकर 3 विकेट लिए. फिर से ड्रॉप कर दिया गया. वापस अंडर 16. 2 साल के लिए. बॉलिंग से ज़्यादा बैटिंग में काम कर रहा था. मुंबई के खिलाफ़ 72  रन बनाये. कुल 253 रन. पूरे सीज़न में. और यहीं उसका सेलेक्शन हुआ अंडर 15 टीम में. इंडिया के लिए. साल 2000. दस मैचों में 15 विकेट लिए. थाईलैंड के खिलाफ़ 2 रन देकर 3 विकेट. इंडिया ने पूएर टूर्नामेंट में मात्र एक मैच हारा.

अब वो मैदान के साथ साथ ट्वीटर पर भी सबके विकेट चटका रहे हैं. उन्होंने किसान आंदोलन का समर्थन करने वाली रेहाना के ट्वीट पर बवाल मचाने वाले सभी लोगो को जवाब देते हुए ज़बरदस्त ट्वीट किया है जिस से तहलका मच गया है. उन्होंने अपने एक टवीट से सबको पवेलियन पहुँचा दिया है.

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