इलमा अफरोज IPS ने देश की खातिर छोड़ दी अमेरिका में नोकरी,कर रही ये बड़ा काम,दीजिये बधाई

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आज के समय में बच्चे पढ़-लिखकर एक अच्छी नौकरी पाना चाहते हैं और अगर उन्हें विदेश से नौकरी का ऑफर मिल जाए तो इससे बड़ी बात उनके लिए नहीं हो सकती और वह विदेश जाकर रहने लगते हैं| लेकिन अपने देश का क्या? परंतु यदि मैं आपको यह कहूँ कि एक लड़की ने अमेरिका की लाखों रुपये की नौकरी को ठुकरा कर अपने वतन वापस आकर देश सेवा का विकल्प चुना है तो शायद आपको मेरी बातों पर विश्वास न हो|

लेकिन यह सौलह आने सच बात हैं| आइए जानते हैं इस देश प्रेमी लड़की के बारें में|बड़ी ही रोचक कहानी है इल्मा अफ़रोज़ की
उत्तरप्रदेश में मुरादाबाद के एक छोटे से गाँव कुंदरकी में रहने वाली इल्मा अफ़रोज एक बहुत ही होनहार और मेहनती लड़की है| इल्मा ने अपने गाँव कुंदरकी को जिसे शायद ही कोई जानता था आज उसे भी एक नई पहचान दी है| आज जब भी कुंदरकी की बात होती है तो उस वार्तालाप का विषय सिर्फ और सिर्फ इल्मा ही होती है| आज देश प्रेमी इल्मा ने वो कर दिखाया है जो हर किसी के बस की बात नहीं है|

बचपन में ही हो गया था पिता का देहांत,इल्मा जब 14 वर्ष की थी तो उनके पिता का देहांत हो गया था| इल्मा के पिता घर चलाने का एकमात्र साधन थे| पिता के देहांत के बाद तो मानो इल्मा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, क्यूंकि घर की सारी ज़िम्मेदारी इल्मा के कंधों पर आ गई थी| लेकिन उनकी अम्मी ने उनका साथ दिया और उनकी पढ़ाई पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ने दिया| लेकिन इल्मा अब अपनी अम्मी को ज्यादा परेशान नहीं करना चाहती थी|लोगो ने बोला कि शादी कराके बोझ कम करो,

लेकिन अम्मी ने किसी की एक नहीं सुनी जब इल्मा के पिता का देहांत हो गया था तो लोगो और रिशतेदारों ने कहा कि इस लड़की की पढ़ाई में पैसा लगाने की जरूरत नहीं है यह लड़की है पढ़-लिखकर भी क्या कर लेगी, इसकी शादी करा दो बोझ कम हो जाएगा| लेकिन इल्मा की अम्मी उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं चाहती थी और उन्होंने इल्मा की शादी के पैसो को इल्मा की पढ़ाई में लगा दिया| लोगों ने बहुत ताने मारे, लेकिन इल्मा की माँ को इल्मा पर पूरा विश्वास था|

सेंट स्टीफेंस दिल्ली से ऑक्सफोर्ड तक का सफर,इल्मा ने अपनी उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिला ले लिया| इल्मा की सम्पूर्ण उच्च शिक्षा छात्रवृति के आधार पर ही हुई थी| सेंट स्टीफेंस से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें ऑक्सफोर्ड जाने का अवसर मिला| जब इल्मा ऑक्सफोर्ड पहुंची तो उन्होंने वहाँ भी अपना अच्छा प्रदर्शन किया| ऑक्सफोर्ड में गुजारे के लिए इल्मा कभी-कभी ट्यूशन भी पढ़ाती थी और अपनी सफलता पर इल्मा कभी घमंड नहीं करती थी|

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