इकबाल अंसारी ने राममंदिर के लिए दिया गुप्त दान,हिन्दू मुस्लिम को लेकर कही बड़ी बात

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रामनगरी अयोध्या में बाबरी मस्जिद के लिए लड़ाई लड़ने वाले इकबाल अंसारी ने भी राममंदिर के लिए समर्पण निधि दी है। इकबाल अंसारी ने शनिवार को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए गुप्त दान दिया है। इकबाल अंसारी ने अपने वालिद व बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार हाजी मोहम्मद हाशिम अंसारी, पत्नी, बेटे और बेटी सहित अपने नाम का कूपन कटवाया है।

इकबाल अंसारी ने राधाकृष्ण की फोटो छपे लिफाफा में अंशदान धन रखकर समर्पण निधि समर्पित किया। इकबाल अंसारी ने शनिवार को दान के बाद अपने आवास पर आरएसएस के महानगर प्रचारक अनिल से मंदिर निर्माण के लिए दान का कूपन प्राप्त किया। उन्होंने न केवल स्वयं के नाम से बल्कि अपने मरहूम पिता एवं बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे मोहम्मद हाशिम अंसारी, पत्नी तथा दो बेटों के नाम से भी कूपन कटवाया।

इस अवसर पर इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण से देश की तरक्की का रास्ता खुलेगा और इससे राष्ट्रीय एकता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने दान दी गई धनराशि का ब्योरा देने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह तो आस्था का विषय है। इसे गोपनीय ही रहने दें। उन्होंने कहा कि हमारा मजहब इस्लाम कहता है कि दान गुप्त ही देना चाहिए। एक हाथ से दिया गया दान दूसरे हाथ को मालूम नहीं हो, उनका कहना है कि धर्म के कार्य के लिए सभी को दान करना चाहिए, दान लेना हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों में मान्य है।

अंसारी ने कहा कि वह चाहते हैं कि देश में अमन शांति रहे। दोनों धर्मों के बीच भाईचारा रहे इसके लिए वह दुआ भी करते हैं। इकबाल अंसारी ने हाल ही में राम मंदिर निर्माण के लिए अब श्रमदान भी करने की जताई इच्छा जताई थी। इकबाल अंसारी चाहते है कि अयोध्या से देश में ही नहीं विश्व भर में अब हिंदू-मुस्लिम एकता का एक संदेश प्रसारित हो। इसके साथ ही अंसारी ने पूरे देश के हिंदू और मुसलमानों से राम मंदिर निर्माण में आॢथक सहयोग करने की अपील भी की।

इकबाल अंसारी ने कहा कि अगर मौका मिला तो वह भी रामलला के मंदिर के लिए श्रमदान करेंगे। अंसारी ने कहा था कि वह चाहते हैं कि देश में अमन शांति रहे। दोनों धर्मों के बीच भाईचारा रहे इसके लिए वह दुआ भी करते हैं। भले ही इकबाल अंसारी बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहें हो पर उन्होंने हमेशा भाईचारा की बात ही है। इससे पहले जब राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना सुप्रीम फैसला नहीं सुनाया था, तब भी वह भाईचारे की बात करते थे।ये खबर हिंदुस्तान न्यूज़ से ली गयी है

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