एक शादीशुदा मर्द कितने दिनों तक अपनी बीवी से दूर रह सकता है,जानिए इस्ला’म का हुक्म

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शादीशुदा मर्द अगर अपनी औरत के बग़ैर रहना मुहाल समझता है तो एक इन्सान होने के नाते उस मर्द की बीवी भी ऐसे जज़बात की हामिल हो सकती है।जो गैर मुल्क चला गया हो और वो इसके जुदाई में उदास रहने लगती है।बसा-औक़ात ऐसी समाजी बुराईयों के बाइस बीवी कमज़ोर भी पड़ सकती है और बुराई की तरफ अपने कदम उठा सकती है।समाज में देखा भी जाता है कि जब शौहर कई कई साल घर नहीं आते हैं,तो बीवी गलत कदम उठा देती है।

इन हालात में ये सवाल उठाया जाता है कि एक शादीशुदा मर्द ज़्यादा से ज़्यादा कितनी मुद्दत तक बीवी से दूर बैरून-ए-मुल्क रह सकता है?जो लोग अपने घरों से दूर रहते हैं,वह लोग इस मसले को ज़रूर जानें।आज हम आप को यहाँ पर यही बताएँगे कि एक शादीशुदा मर्द ज़्यादा से ज़्यादा कितनी मुद्दत तक बीवी से दूर बैरून-ए-मुल्क रह सकता है,इस बारे में हमें तारीखुल खुलफ़ा में एक रिवायत मिलती है.

जो इस्ला’म के दूसरे खलीफा हज़रत उम्र फारूक रज़ी अ ल्लाहु ताला अनहु के हवाले से है,इस रिवायत को पढ़ कर आप अच्छी तरह से समझ जाएँगे कि एक शौहर को अपनी बीवी से कितने दिन दूर रहना चाहिए।दोस्तों हज़रत उम्र फारूक रज़ी अल्लाहु ताला अनहु जब इस्ला म के खलीफा बने,तो वह रातों को शहर में घूमा करते थे,ताकि अगर कोई किसी तकलीफ में हो तो उसे दूर किया जाये।

तारीख में इस तरह के कई वाकये मौजूद हैं कि हज़रत उम्र फारूक रज़ी अल्लाहु ताला अनहु अपनी पहचान छुपा कर दूसरों की मदद करते थे।तारीखुल खुलफ़ा में ज़िक्र किया गया है कि हज़रत उम्र फारूक रज़ी अल्लाहु ताला अनहु रात के वक़्त गशत कर रहे थे तो एक घर से एक औरत की आवाज़ आरही थी और वो कुछ अशआर पढ़ रही थी।मफ़हूम ये था कि इस का शौहर घर से कहीं दूर चला गया था और वो इसके फ़िराक़ में गुम-ज़दा थी।

सय्यदना उम्र फ़ारूक़ रज़ी अल्लाह अन्ना घर आए और अपनी ज़ौजा से दरयाफ़त किया कि शादीशुदा औरत शौहर के बग़ैर कितनी मुद्दत सब्र कर सकती है तो ज़ौजा ने जवाब दिया कि तीन से चार माह।आपने हुक्म जारी कर दिया कि हर फ़ौजी को चार माह बाद ज़रूर छुट्टी दी जाये ताकि हर फ़ौजी अपनी बीवी का हक़ अदा कर सके।उल्मा किराम फ़रमाते हैं कि चार माह तक अगर शौहर औरत का हक़ अदा ना करे तो औरत को हक़ हासिल है कि वो खुला का मुतालिबा करे ये इस सूरत में है जब औरत राज़ी ना हो।

इसलिए शौहर को चाहिए कि वो औरत को राज़ी रखे और हो सके तो कम अज़ कम साल में ज़रूर अपने घर का चक्कर लगाए,अगर मुम्किन हो तो औरत को अपने साथ ही रखे।बाहमी रजामंदी से अगर ज़्यादा वक़्त दूर रह सकते हैं तो इस में कोई हर्ज नहीं लेकिन अगर फ़ित्ना का ख़ौफ़ हो तो फिर रजामंदी भी बेफ़ाइदा है क्योंकि ज़्यादा अरसा तक घर वापिस ना आना बहुत से नुक़्सानात का बाइस बन सकता है।

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