इस गांव में नहीं है एक भी मुस्लिम परिवार फिर भी होती है मस्जिद में पांचों वक्त अज़ान और नमाज़।

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आज कल देश में हर जगह जहां कई मौकों पर हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव की स्थिति देखने और सुनने को मिल रही है, वहीं कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां हिंदू मुसलमान भाई चारे की ऐसी मिसाले हैं जिनकी नज़ीर मिलना मुश्किल है, ऐसा ही एक गांव बिहार के नालंदा जिले में है जो कई दशकों से हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर रहा है। यह जानकर लगभग सभी चौंक जाते हैं कि इस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, लेकिन यहां की मस्जिद में नियमानुसार पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है और अजान होती है। यह सब कुछ हिंदू समुदाय के लोग ही करते हैं।

नालंदा जिले के बेन प्रखंड के माड़ी गांव में टोटल हिन्दू समुदाय के लोग रहते हैं। लेकिन यहां एक मस्जिद भी है। और यह मस्जिद गांव में मुसलमानों की आबादी नहीं होने के बावजूद भी उपेक्षित नहीं है, बल्कि हिंदू समुदाय के लोग इसकी बाकायदा देख-रेख करते है, यहां पांचों वक्त नमाज अदा करने की व्यवस्था करता है। मस्जिद का रख-रखाव, रंगाई-पुताई का जिम्मा भी हिंदुओं ने उठा रखी है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि सालों पहले यहां मुस्लिम परिवार रहते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनका पलायन हो गया और इस गांव में उनकी मस्ज्दि रह गई। इस मस्जिद का निर्माण कब और किसने कराया, इसे लेकर कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने जो उन्हें बताया है, उसके मुताबिक यह करीब 200-250 साल पुरानी है। मस्जिद के सामने एक मजार भी है, जिस पर लोग चादरपोशी करते हैं।

गांव के बुजुर्ग जानकी पंडित ने बताया कि इस गांव को कभी भी दंगे की आंच नहीं आने दी। दोनों समुदाय के लोग बड़े ही अदब से इस गांव में रहते थे। मस्जिद में मौजूद एक पत्थर को लेकर बुजुर्ग ने कहा कि अगर गांव में किसी को गलफुली रोग होता है, तो वह मस्जिद में मौजूद पत्थर को रगड़ कर इस में पानी डाल कर अपने गालों पर लगा लेते हैं। इससे उनका यह रोग ठीक हो जाता है।

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