मैंने जब क़ु’रआन को ह़िफ़्ज़ करना शुरू किया तो जनरल नॉलेज मेरे लिए खिलौना बन गया – सी’रिया से सारा

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सी रिया जैसे यू द्धग्रस्त देश के तबाह ह़ाल शहर इदलिब के बाहरी इलाक़ों के ख़ेमे में ज़िन्दगी से जूझने वाली “सारा क्याली” ने (दानिशमंदी का आलमी मुक़ाबला) International Mental Arithmetic Competition जीत लिया है ज्ञात रहे कि यह मुक़ाबला चीन की एक संस्था ACIDA ने आयोजित किया था जिसमें 19 देशों के 6114 बच्चों ने ह़िस्सा लिया , इस मुक़ाबले में

चीन , ब्रिटेन और अमेरिका के बच्चे भी शामिल थे..कंप्टीशन का शुरूआती दौर ताइवान में आयोजित हुआ था जबकि फाइनल मुक़ाबला चीन में हुआ जिसे मात्र आठ साल की “सारा क्याली” ने जीतकर पहली पोज़ीशन ह़ास़िल की जब सारा क्याली से पूछा गया कि..एक जं ग से तबा ह हो चुके मुल्क में उसने इतनी अक़्ल कहां से ह़ासिल की?

तो उसका जवाब था यह सब क़ु’रआन की वजह से मुमकिन हुआ मैंने जब क़ु’रआन को ह़िफ़्ज़ करना शुरू किया तो जनरल नॉलेज मेरे लिए खिलौना बन गया अब तक क़ुरआ’न के 9-पारे भी मैं ह़िफ़्ज़ कर चुकी हूं मेरी ख़्वाहिश है कि मैं एक साइंटिस्ट बनूं और अपनी क़ौम-ओ-मिल्लत के काम आऊं

इन्शान अगर कुछ करना चाहे तो क्या नही कर सकता है उसके लिए कोई काम बड़ा नही कंप्यूटर को बनाने वाला भी इन्शान कंप्यूटर से गलती नही होती जबकि इन्शान से गलती हो जाती है जबकि कंप्यूटर इन्शान के द्वारा ही बनाई गई एक मसीन है । सारा क्याली ने इस बात को सही साबित कर दिया इन्शान के लिए कुछ भी नामुमकिन नही अक्सर रोशनी वही से उभरती है जिधर अंधेरे होते हैं ।

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