देश में पहली बार आए एक दिन में कोविड-19 के 75,000 से ज्यादा मामले

भारत में पिछले 24 घंटे में COVID-19 के सर्वाधिक 75,760 नए मामले आने से कुल मामले Tuesday सुबह बढ़कर 33,10,234 हो गए जिनमें से 7,25,991 सक्रिय हैं. गौरतलब है, देश में पहली बार 75,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं, देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 60,472 हो गई जबकि 25,23,771 लोग अभी तक ठीक हो चुके हैं.

COVID-19 महामारी से सामने आ रही चुनौती और खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार सभी ज़रूरी कदम उठा रही है. देशभर की जनता के एक्टिव सहयोग से इस वायरस के प्रसार को कंट्रोल करने में सक्षम हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की गई जानकारी और गाइडलाइन्स को सावधानी और सही तरीके से पालन कर वायरस के स्थानीय प्रसार को रोका जा सकता है.

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फ़रवरी में चीन के वैज्ञानिकों ने वुहान शहर के रोगियों पर एक शोध किया। शोध में पाया कि “कोरोना वायरस संक्रमण का असर लोगों के मस्तिष्क पर भी हुआ.” चीनी वैज्ञानिकों ने COVID-19 के मरीज़ों में जो लक्षण देखे थे, उन्होंने उन सभी को ‘एन्सीफ़ेलोपैथी’ का संकेत बताया था. मेडिकल की भाषा में ‘एन्सीफ़ेलोपैथी’ शब्द का प्रयोग दिमाग में हुए नुक्सान के लिए होता है.

बहुत सारे वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड-19 के रोगियों में दिख रहे ये लक्षण दिमाग़ में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण हैं जो साँस की गंभीर समस्या होने पर आमतौर पर होती है. जबकि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस सीधे तौर पर भी दिमाग़ पर हावी हो रहा है.

संक्रामक बीमारियों से दिमाग़ की हिफाज़त के लिए सिर के अंदर एक ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ होता है जो टॉक्सिक एजेंट को दिमाग़ में जाने से रोकता है.
अगर कोरोना वायरस इस बैरियर को पार कर सकता है, “यह ना सिर्फ़ नसों की केंद्रीय व्यवस्था यानी सेंट्रल नर्व सिस्टम को प्रभा:वित कर सकता है, बल्कि दिमाग़ में कई सालों तक रह भी सकता है.”

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