मदरसे में पढ़ने वाला 15 साल का बहादुर लड़का वहीं पर 20 बच्चों को बचाते हुए मर गया

बस 15-16 बरस का था अशफाक. कोई पूछता कि बड़े होकर क्या बनोगे, तो कहता- मौलवी. इस उम्र के बाकी लड़के जाने क्या सपने देखते होंगे. लेकिन अशफाक सोचता था कि एक दिन मस्जिद की मीनार से उसकी आवाज गूंजेगी. अशफाक का ये सपना अधूरा ही रहेगा. पिछले हफ्ते शुक्रवार को आई तेज आंधी में उसके मदरसे की मीनार टूटकर नीचे गिर गई.

अशफाक उसके नीचे दबकर मर गया. लेकिन मरने से पहले उसने 20 लोगों की जान बचाई. जिनकी उसने जान बचाई, वो ताउम्र उसको याद रखेंगे. अशफाक उनका हीरो रहेगा. हमेशा. ये 6 अप्रैल की बात है. हरियाणा के मेवात में एक बमबाहेरी गांव है. यहीं के मदरसे की घटना है ये. अपनी जान बचा सकता था अशफाक, लेकिन वो औरों को बचाता रहा उस दिन शाम के वक्त अशफाक कुरान पढ़ने मदरसा पहुंचा. इसी दौरान तेज आंधी-तूफान आया.

इतनी तेज कि एक मीनार हिलने लगी. अशफाक की नजर गई. उसे लगा कि खतरा है. उसने चिल्लाकर औरों को बताया. बच्चे बाहर भागने लगे. लेकिन अशफाक नहीं भागा. वो बाकी बच्चों को बाहर निकालने में जुटा था. इसी दौरान मीनार टूटकर छत पर गिर गई.

अशफाक और उसके साथ एक और बच्चा उसके नीचे दब गए. बाद में गांववालों ने उन्हें निकाला. तब तक उसमें जान बाकी थी. उसे अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने कहा कि हालत काफी खराब है. दिल्ली लेकर जाएं, तो बचने की उम्मीद हो सकती है. अशफाक को दिल्ली लाया गया.

मगर बचाया नहीं जा सका. हरियाणा वक्फ बोर्ड को भी इस हादसे की खबर मिली. बोर्ड ने मदरसे की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये देने का ऐलान किया. कहा कि दो लाख रुपये की मदद अशफाक के परिवार को भी मिलेगी. उधर अशफाक के अब्बू दीन मुहम्मद ने कहा कि वो अपने हिस्से के रुपये भी मदरसे को ही दे देंगे.


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