अमला की ईमानदारी पर खचाखच भरे स्टेडियम से लोगों ने खड़े होकर किया सेल्यूट

जगह थी एम चिन्नास्वामी स्टेडियम, दिन था शुक्रवार का, स्ट्राइक पर दाढ़ी वाला वो शांत किस्म का बल्लेबाज था, शायद पहली बॉल पर छक्का मारना चाहता था, सामने रॉयल चैलेंजर बैंगलोर के अनिकेत के हाथ मे बोल थी, राइट हैंड ओवर दी विकेट, दाढ़ी वाले प्लेयर ने बल्ला घुमाया, दर्शकों ने देखा बल्ला गेंद को छू भी नहीं पाया…

गेंद सीधे विकेटकीपर के दस्तानों में, बिल्कुल कोई शोर शराबा नहीं, कोई अपील नहीं, एम्पायर के चेहरे पर “डॉट बॉल” के संकेत, हम सब भी यही जानते हैं कि वो एक डॉट बॉल थी, हमारी आंखों ने सिर्फ वही देखा, लेकिन पूरे 50 हजार लोगो से खचाखच भरे स्टेडियम में सिर्फ एक बन्दा था जिसे पता था कि ये “डॉट बॉल” नहीं थी। उस दाढ़ी वाले प्लेयर ने अपना हेलमेट उतारा, ग्लब्ज़ उतारने शुरू किए और पवेलियन की तरफ चलने लगा, दर्शक शांत हो गए, लगा कुछ गड़बड़ है, अम्पायर ने बुलाया- “क्या बात है मुल्लाजी, खेलने का दिल न है क्या आज” इसपर मुल्लाजी ने जो कहा अम्पायर का चेहरा बदल गया…थर्ड अंपायर को रिव्यू भेजा गया।

Hashim amla

रिव्यू में जो डिसीजन आया उसे देखकर शून्य पर आउट होने वाले दाढ़ी वाले के लिए, 50 हजार लोग सीटों से खड़े हुए और जोर शोर से “अमला अमला” के नारे स्टेडियम में गूंजने लगे, आइये जानते हैं क्या हुआ होगा, लेकिन इससे पहले अमला कौन है उनके बारे में थोड़ा सा पढ़िए…

दुनिया भर में सैंकड़ो क्रिकेटर्स हैं हैं जो अपने किसी न किसी काम के चलते मीडिया की सुर्खियाँ बने रहते हैं, लेकिन, हम आज बात कर रहें हैं उस खिलाड़ी की जो मैदान पर होते हुए अपने खेल की वजह से कम बल्कि अपनी मान्यताओं की वजहसे ज्यादा जाना जाता है. हाशिम अमला यूँ तो दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज हैं लेकिन इसके आलावा उनका कहना है की वो जब मैदान पर होते हैं तो वो दक्षिण अफ्रीका की तरफ से ही नहीं बल्कि अरबों मुसलमानों की तरफ से इस्लाम के सिद्धांतों को दुनिया को दिखाते हैं जिसका चलता फिरता नमूना वो खुद है…

क्रिकेट को जेंटलमेन गेम कहा जाता था, लेकिन जैसे जैसे क्रिकेट के ओवर कम होते गए क्रिकेट की मर्यादाएं भी टूटने लगीं । आईपीएल ने तो क्रिकेट का रंग रूप बदल दिया है, खिलाड़ी एक दूसरे को भिड़ जाते हैं. विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच हुई गहमागहमी को शायद ही कोई भूल सके और ये सभी चीजें उनकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव ही डालती हैं लेकिन ऐसे में जब कोई खिलाड़ी खेल-भावना का परिचय दे तो कहना ही क्या…ऐसा ही वाकया एक बार एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और किंग्स इलेवन पंजाब के मैच के दौरान भी सामने आया…

हुआ यूं कि पंजाब के ओपनर हाशिम अमला पहले ही ओवर में अनिकेत चौधरी की गेंद को खेलने की कोशिश में अपना बल्ला लगा बैठे और बॉल सीधे विकेटकीपर केदार जाधव के दस्तानों में समा गई। लेकिन इस पर मैदान में मौजूद किसी भी खिलाड़ी ने कोई अपील नहीं की क्योंकि किसी को अंदाजा ही नहीं हुआ था कि बैट से बॉल लगी है ..

हालांकि हाशिम अमला को पता था कि गेंद उनके बल्ले को छूकर निकली है. हाशिम अमला ने जैंटलमेन गेम की इज्ज़त रखी और अंपायर के आउट दिए बगैर ही सीधे पवेलियन की ओर लौटने लगे। अमला आउट थे, ये बात रीप्ले में देखने पर भी सामने आई अमला की इस खेलभावना को मैच देख रहे हर शख्स ने सराहा…

हो सकता है की उनके रवैये पर दक्षिण अफ्रीकी प्रशंषकों ने गालियाँ दी हों लेकिन उनका मानना है कोई देखे या न देखे अल्लाह देख रहा है. बस उनका यही अंदाज है जो लाखो लोगो के दिल जीत लेता है, जिसकी वजह से वो लाखो लोगो के दिलो पर राज करते हैं. इस्लाम को उन्होंने अपने ऊपर इस तरह हावी किया हुआ है की एक बार एक साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया, यदि भविष्य में कोई एसा रूल बने जो इस्लाम के खिलाफ जाता हो तो आप क्या करेंगे? इसके जवाब में अमला ने जो जवाब दिया वो बहुत ही चुभता हुआ था एंकर को इसकी सम्भावना भी नहीं थी उन्होंने कहा-अगर मुझे क्रिकेट की वजह से इस्लाम छोड़ना पड़ा तो मैं, क्रिकेट को ही छोड़ दूंगा इस्लाम को नहीं छोड़ सकता।

 

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